भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD)

भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) और गलघोंटू से लाखों का नुकसान कैसे रोकें?

भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD)

भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) टीका नहीं लगवाया तो दूध, पैसा और पशु — तीनों का भारी नुकसान | हरियाणा किसानों के लिए पूरी वैज्ञानिक गाइड भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD)

हरियाणा और भारत के डेयरी किसानों के लिए वैज्ञानिक रिसर्च पर आधारित पूरी जानकारी

यह गाइड 1 से 20 गाय-भैंस रखने वाले किसानों के लिए है। इसमें बीमारी के फैलने का तरीका, टीके का असर, दूध कम होने की सच्चाई, सूजन क्यों आती है, नुकसान कितना होता है और किसान को क्या करना चाहिए — सब विस्तार से समझाया गया है।

टीकाकरण क्यों जरूरी है? किसान जरूर समझें

हरियाणा के किसान के लिए उसकी गाय-भैंस ही असली बैंक/कमाई का आधार होता है। लेकिन दो बीमारियां ऐसी हैं जो कुछ ही दिनों में सालों की मेहनत खत्म/पानी फेर सकती हैं:

 

    1. खुरपका-मुंहपका (FMD / मुंहपका-खुरपका)

    1. गलघोंटू (HS / गलघोटू)

ये बीमारियां:

 

    • दूध अचानक गिरा देती हैं

    • पूरे झुंड/बाड़े/गाँव में फैल जाती हैं

    • गर्भपात/ बच्चा गिरा सकती हैं

    • गाय/भैंस के छोटे बच्चे की जान ले सकती हैं

    • कई बार पशु की मौत तक कर देती हैं

अच्छी बात यह है कि दोनों बीमारियों से बचाव सिर्फ एक संयुक्त टीके से हो सकता है, जो साल में दो बार लगाया जाता है।

गलघोंटू (HS) — अचानक मार देने वाली बीमारी

गलघोंटू एक खतरनाक बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। इसकी सबसे डरावनी बात यह है कि पशु सुबह तक बिल्कुल ठीक दिख सकता है और शाम तक मर सकता है।

गलघोंटू के मुख्य लक्षण

 

    • तेज बुखार (106-107°F तक)

    • गले और जबड़े के नीचे गर्म सूजन/ गलघोंटू

    • सांस लेने में आवाज आना (भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) )

    • मुंह से लार गिरना

    • खाना-पानी निगलने में दिक्कत

    • 24-48 घंटे में मौत

कई बार किसान को बीमारी समझने का मौका भी नहीं मिलता।

सबसे जरूरी बात

गलाघोंटू में इलाज अक्सर देर से होता है। टीका ही असली बचाव है।

खुरपका-मुंहपका (FMD) — दूध और कमाई खत्म करने वाली बीमारी

यह वायरस से होने वाली बहुत तेजी से फैलने वाली बीमारी है।भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) 

मुख्य लक्षण

 

    • तेज बुखार

    • मुंह में छाले

    • खुरों के बीच घाव

    • चलने में दिक्कत

    • अचानक दूध गिरना

    • बछड़ों में अचानक मौत

    • गर्भवती पशु में गर्भपात

छुपी हुई सच्चाई

पशु ठीक दिखने के बाद भी कई महीनों तक बीमारी फैलाता रह सकता है। यानी एक पशु पूरे झुंड को फिर से बीमार कर सकता है।

बीमारी कैसे फैलती है?

खुरपका-मुंहपका बहुत तेजी से फैलती है:

 

    • लार, दूध, गोबर, पेशाब से

    • हवा से (बीमारी का कीटाणु 6km तक हवा मैं फैल सकता है।)

    • पशु मेले से (जो पशु बीमार है उनके लार, दूध, गोबर, पेशाब से)

    • खरीद-फरोख्त से/जब आप नया पशु खरीदते हैं अगर वो बीमार हो तो।

    • बीमारी लगे होए ट्रैक्टर, रस्सी, जूते, कपड़ों से

    • बीमारी लगे होए दूध से

    • बीमारी लगे होए आवारा जानवरों से -भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) 

हरियाणा में ज्यादा खतरा क्यों?

 

    • पशुओं की संख्या ज्यादा

    • लगातार पशु खरीद-फरोख्त

    • मेलों और मंडियों की आवाजाही

    • बरसात में गलाघोंटू का खतरा बढ़ना

इसलिए हरियाणा में समय पर टीका बहुत जरूरी है।

टीका शरीर में कैसे काम करता है?

बहुत किसान सोचते हैं कि टीका लगते ही सुरक्षा मिल जाती है।
लेकिन शरीर को सुरक्षा बनाने में समय लगता है।भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) 

टीका लगने के बाद शरीर में क्या होता है?

दिन शरीर में महत्वपूर्ण बात
दिन 0 टीका शरीर में बीमारी की पहचान करवाता है। टीका बीमारी नहीं करता।
यह शरीर को बीमारी से लड़ना सिखाता है।  
दिन 1-3 शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत काम करने लगती है।
दिन 7-14 एंटीबॉडी/ बीमारी से बचाने वाले तत्व बननी शुरू होती हैं।
दिन 14-21 पूरा बचाव तैयार हो जाता है।

हर 6 महीने बाद टीका क्यों जरूरी?

कई किसान सोचते हैं कि एक बार टीका लग गया तो जीवनभर सुरक्षा मिल गई। यह गलत है। खुरपका-मुंहपका की सुरक्षा लगभग 4-6 महीने तक रहती है। इसलिए हर 6 महीने बाद बूस्टर/ सुरक्षा बढ़ाने वाला डोज जरूरी है। अगर एक डोज छूट गई तो पूरा झुंड खतरे में आ सकता है।भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) 

टीका लगने के बाद दूध कम क्यों होता है?

यह सबसे बड़ा डर है। लेकिन सच समझना जरूरी है। दूध कम होने का वैज्ञानिक कारण

टीका लगने के बाद शरीर:

 

    • एंटीबॉडी/ बीमारी से बचाने वाले तत्व बनाने में ऊर्जा लगाता है

    • कुछ समय भूख कम हो जाती है

    • शरीर हल्का तनाव महसूस करता है

इसी वजह से 1-3 दिन के लिए दूध थोड़ा कम हो सकता है।

कितना दूध कम होता है?

रिसर्च/खोज  के अनुसार:

 

    • लगभग 300-600 ग्राम प्रतिदिन

    • सिर्फ 2-3 दिन के लिए

    • ज्यादातर पशु 5-6 दिन में सामान्य हो जाते हैंभैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) 

कारक टीकाकरण के साथ टीकाकरण के बिना
दूध कम होने की अवधि 1–3 दिन (0.3–0.6 किग्रा/दिन कमी) 30–60 दिन (40–80% तक कमी)
प्रति भैंस कुल दूध हानि लगभग नहीं 210–250 लीटर
प्रति पशु खर्च ₹30–60 प्रति डोज ₹21,682 प्रति बीमार भैंस
गलघोंटू बीमारी में मृत्यु जोखिम लगभग शून्य इलाज न होने पर 80–100%
दूध उत्पादन की वापसी 3–5 दिन में पूरी रिकवरी अक्सर स्थायी कमी
खुरपका-मुंहपका वायरस फैलाने का खतरा सुरक्षा रहती है ठीक होने के बाद भी 3.5 साल तक वायरस फैला सकता है
पूरे झुंड की सुरक्षा अधिक — बीमारी फैलने से रोकता है एक बीमार पशु 24–48 घंटे में पूरे झुंड को संक्रमित कर सकता है

दूध कम होने से बचाने के उपाय

 

    • अच्छा चारा दें

    • साफ पानी दें

    • ज्यादा मेहनत वाला काम न करवाएं

    • तनाव न दें

    • बिना जरूरत दर्द की दवा न दें -भैंस और गाय में खुरपका-मुंहपका (FMD) 

टीका लगने के बाद सूजन क्यों आती है?

लगभग 70-80% पशुओं में हल्की सूजन आ सकती है। यह सामान्य बात है।

सूजन क्यों आती है?

टीके में ऐसे पदार्थ होते हैं जो शरीर की सुरक्षा बढ़ाते हैं। इसी कारण वहां हल्की गांठ या सूजन बन सकती है।

सामान्य सूजन कैसी होती है?

 

    • हल्की गांठ

    • ज्यादा दर्द नहीं

    • 7-14 दिन में ठीक

क्या करें?

 

    • जोर से मालिश न करें

    • साफ रखें

    • जरूरत हो तो हल्की गर्म सिकाई करें

कब खतरा समझें?

अगर:

 

    • बहुत गर्म सूजन हो

    • पस बने

    • पशु खाना छोड़ दे

    • सांस लेने में दिक्कत हो

तो तुरंत डॉक्टर को बुलाएं।

असली नुकसान — हरियाणा किसानों के लिए आर्थिक हानि की गणना

भारत में किए गए शोधों/खोज  के अनुसार, एक संक्रमित/बीमार  भैंस पर औसतन ₹21,682 और एक गाय पर ₹12,532 तक का आर्थिक नुकसान होता है। इसमें लगभग 50% नुकसान केवल दूध उत्पादन कम होने से होता है। हाल के अध्ययनों में भैंसों में यह नुकसान ₹23,800 प्रति पशु तक बताया गया है।

प्रति पशु आर्थिक नुकसान तालिका

पशु प्रति पशु नुकसान 5 पशुओं का नुकसान 10 पशुओं का नुकसान 20 पशुओं का नुकसान
भैंस ₹21,682 ₹1,08,410 ₹2,16,820 ₹4,33,640
गाय ₹12,532 ₹62,660 ₹1,25,320 ₹2,50,640
भैंस (उच्च अनुमान) ₹23,800 ₹1,19,000 ₹2,38,000 ₹4,76,000
केवल दूध का नुकसान कुल नुकसान का लगभग 50% ₹54,000+ ₹1,08,000+ ₹2,16,000+

दूध नुकसान गणना (खुरपका-मुंहपका प्रकोप)

नीचे दी गई तालिका खुरपका-मुंहपका के बाद 60 दिनों तक दूध में 40% कमी के आधार पर बनाई गई है। टीकाकरण लागत में साल की 2 डोज शामिल हैं।

पशु संख्या प्रकार औसत दूध (ली./दिन) दूध कमी (%) नुकसान अवधि (दिन) कुल दूध नुकसान (लीटर) आर्थिक नुकसान (@₹40/ली.) टीका खर्च शुद्ध बचत
1 गाय 8 40 60 192 ₹7,680 ₹60 ₹7,620
1 भैंस 6 40 60 144 ₹5,760 ₹60 ₹5,700
3 गाय 8 40 60 576 ₹23,040 ₹180 ₹22,860
3 भैंस 6 40 60 432 ₹17,280 ₹180 ₹17,100
5 गाय 8 40 60 960 ₹38,400 ₹300 ₹38,100
5 भैंस 6 40 60 720 ₹28,800 ₹300 ₹28,500
10 मिश्रित पशु 7 40 60 1,680 ₹67,200 ₹600 ₹66,600
15 मिश्रित पशु 7 40 60 2,520 ₹1,00,800 ₹900 ₹99,900
20 भैंस 6 40 60 2,880 ₹1,15,200 ₹1,200 ₹1,14,000
20 गाय 8 40 60 3,840 ₹1,53,600 ₹1,200 ₹1,52,400

टीकाकरण पर खर्च किया गया हर ₹1 लगभग ₹100–110 तक का नुकसान बचा सकता है। 10 भैंसों के झुंड में सालाना केवल ₹600 का टीका खर्च, खुरपका-मुंहपका से होने वाले ₹2 लाख से अधिक नुकसान से सुरक्षा देता है।

हरियाणा किसानों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम

पशु श्रेणी खुरपका-मुंहपका पहला टीका खुरपका-मुंहपका बूस्टर गलघोंटू टीका समय आगे दोहराव
वयस्क गाय और भैंस कभी भी 1 महीने बाद अप्रैल–मई (बरसात से पहले) खुरपका-मुंहपका हर 6 महीने, गलघोंटू साल में 1 बार
बछड़े (4–6 माह) 4 महीने की उम्र पर 1 महीने बाद 6 महीने की उम्र पर खुरपका-मुंहपका हर 6 महीने, गलघोंटू साल में 1 बार
गर्भित पशु सुरक्षित — टीका लगाएं निर्धारित समय अनुसार सुरक्षित — टीका लगाएं हर 6 महीने
नए खरीदे गए पशु खरीदते ही 1 महीने बाद खरीदते ही हर 6 महीने
बीमारी फैलने के बाद वाला झुंड तुरंत 1 महीने बाद आपातकालीन डोज 6 महीने बाद

किसान के लिए सबसे जरूरी समय

टीकाकरण के लिए सबसे अच्छा समय:

 

    • पहला राउंड: मार्च–अप्रैल (गेहूं कटाई और पशु मेलों से पहले)

    • दूसरा राउंड: सितंबर–अक्टूबर (बरसात के बाद)

इसी समय बीमारी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है क्योंकि:

 

    • पशुओं की आवाजाही बढ़ जाती है,

    • मेलों और मंडियों में संपर्क बढ़ता है,

    • और बरसात के बाद गलघोंटू बीमारी तेजी से फैलती है।

इसलिए समय पर टीकाकरण पूरे गांव और झुंड की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।

किसानों की आम गलतफहमियां बनाम वैज्ञानिक सच्चाई

किसान क्या मानते हैं वैज्ञानिक सच्चाई
टीका लगाने से बीमारी हो जाती है टीके में मरे या कमजोर किए गए वायरस/बैक्टीरिया होते हैं, वे बीमारी नहीं फैलाते
स्वस्थ पशु को टीके की जरूरत नहीं स्वस्थ पशुओं को टीका लगाना सबसे जरूरी है
एक बार टीका लग गया तो जीवनभर सुरक्षा खुरपका-मुंहपका सुरक्षा केवल 4–6 महीने रहती है
टीके के बाद दूध कम होना मतलब टीका खराब है 1–3 दिन हल्की कमी सामान्य है
इंजेक्शन की सूजन मतलब पशु बीमार हो गया हल्की सूजन शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है
गांव दूर है इसलिए बीमारी नहीं आएगी बीमारी हवा, पानी और पशु आवाजाही से फैलती है
गर्भित पशु को टीका नहीं लगाना चाहिए सरकारी स्वीकृत टीके गर्भित पशुओं में सुरक्षित हैं

टीकाकरण के बाद क्या करें और क्या न करें

क्या करें क्या न करें
अतिरिक्त हरा चारा और साफ पानी दें 3–5 दिन तक बिना जरूरत एंटीबायोटिक/सुआ न दें
टीके की तारीख किताब में लिखें टीके वाले दिन भारी काम न करवाएं
हल्की सूजन को सामान्य मानें इंजेक्शन वाली जगह को जोर से न मलें
पशु पर 30 मिनट नजर रखें 24 घंटे तक बारिश या नहलाना नहीं
समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर बुलाएं टीकाकरण के बाद तुरंत बाजार न ले जाएं

FAQ

क्या टीका लगने से दूध कम होता है?

हाँ, लेकिन सामान्य रूप से 1-3 दिन के लिए हल्का असर होता है।

गलाघोंटू कितने समय में जान ले सकता है?

24-48 घंटे के अंदर।

FMD का टीका कितने महीने बाद दोबारा लगता है?

हर 6 महीने बाद।

क्या गर्भवती भैंस को टीका लग सकता है?

हाँ, सरकारी मान्यता वाले टीके सुरक्षित माने जाते हैं।

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