भैंस बोलती नहीं, तार नहीं दिखती या आगे की नहीं होती

भैंस बोलती नहीं, तार नहीं दिखाती या आगे की नहीं होती — Silent Heat गर्मी में जेब पर सीधा वार

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हरियाणा के Murrah भैंस पालकों के लिए विशेष — कारण, शरीरक्रिया, आर्थिक नुकसान और 100% व्यावहारिक समाधान

हरियाणा अधिकतर जिलों में हजारों किसान Murrah भैंस पालते हैं। यह नस्ल दुनिया की सबसे ज्यादा दूध देने वाली भैंस मानी जाती है। लेकिन हर साल मार्च से जुलाई के बीच, जब गर्मी चरम पर होती है। अनेक किसान एक ही शिकायत लेकर पशु चिकित्सक के पास पहुँचते हैं: “डॉक्टर साहब, भैंस heat में ही नहीं आ रही/बोलती नहीं है/तार नहीं दिखा रही।” कुछ किसान यह भी सोचने लगते हैं कि उनकी भैंस बांझ हो गई है। लेकिन सच्चाई यह है कि अधिकतर मामलों में भैंस के अंदर अण्डे निकलने की परक्रिया चल रही होती है। बस बाहर से कोई लक्षण नहीं दिखता। इस स्थिति को वैज्ञानिक भाषा में Silent Heat या Sub-Estrus कहते हैं। यह एक ऐसी समस्या है जो किसान को दिखती नहीं, लेकिन उसकी जेब पर सीधा और गहरा असर डालती है।भैंस बोलती नहीं Silent Heat Loss

Silent Heat/ भैंस बोलती नहीं है/तार नहीं दिखा रही। इसका मतलब काया है?

Silent Heat उस स्थिति को कहते हैं जिसमें भैंस के अंडाशय (अंडा बनाने वाली थैली) में अंडा बनता है और अंदर अण्डे निकलने की परक्रिया चल रही होती है। यानी अंदर से प्रजनन चक्र पूरी तरह चल रही है। लेकिन भैंस बाहर से कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती जिससे किसान पहचान सके कि अभी सही समय है।

सामान्य गर्मी  में एक भैंस क्या करती है? वह बार-बार बोलती/रंभाती है, दूसरी भैंसों पर चढ़ने की कोशिश करती है या दूसरी भैंसों को अपने ऊपर चढ़ने देती है। उसकी जनन अंग थोड़ी सूजी हुई और लाल दिखती है। पारदर्शी, चिपचिपा म्यूकस स्राव होता है। भैंस बेचैन रहती है, कम खाती है और दूध भी थोड़ा कम हो जाता है। लेकिन Silent Heat में ये सारे लक्षण या तो बिल्कुल नहीं होते, या इतने हल्के होते हैं कि किसान की नजर उन पर नहीं पड़ती।

यहाँ सबसे बड़ा खतरा यह है कि जब किसान भैंस मैं गर्मी नहीं पहचान पाता, तो वह सही समय पर AI/बीज नहीं डलवाता (आगे होने का टीका/दूध का टिक्का)। अण्डे निकालने  के बाद अंडा केवल 8–12 घंटे जीवित रहता है। अगर उस समये  में AI/ बीज नहीं डलवाया  , तो वह गरमी चक्र बेकार गया।  भैंस अगले 21–23 दिन बाद फिर गर्मी  में आएगी और अगर उस बार भी silent heat रही, तो महीनों तक भैंस खाली रहती है।भैंस बोलती नहीं Silent Heat Loss

Silent Heat/ भैंस बोलती नहीं है/तार नहीं दिखा रही। शरीर में क्या होता है?

Silent Heat को गहराई से समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि भैंस का प्रजनन चक्र कैसे काम करता है और गर्मियों में इसमें क्या गड़बड़ होती है।

भैंस की एक गरमी चक्र 21 से 23 दिनों की होती है। भैंस के शरीर में हीट/गरमी चक्र एक पूरे सिस्टम से आती है। सबसे पहले दिमाग का एक हिस्सा, जिसे Hypothalamus कहते हैं, शरीर को संकेत देता है और GnRH hormone छोड़ता है। इसके बाद दिमाग की दूसरी ग्रंथि Pituitary Gland सक्रिय होकर FSH और LH hormone बनाती है। FSH की मदद से अंडाशय/ अंडा बनाने वाली थैली में एक छोटा अंडे वाला थैला बनता है, जिसे Follicle कहते हैं। धीरे-धीरे यह follicle बड़ा और पक्का होता है। पक्का follicle फिर Estrogen hormone बनाता है, और यही Estrogen hormone भैंस में हीट के बाहरी लक्षण दिखाता है जैसे बेचैनी, बार-बार रंभाना या बोलना, दूसरी पशु पर चढ़ना, नीचे से साफ चिपचिपा पानी आना और खाना कम करना। इसके बाद जब शरीर में LH hormone अचानक बढ़ता है, तब follicle फूट जाता है और उसमें से अंडा बाहर निकलता है। इसी प्रक्रिया को Ovulation/अंडा निकलना कहते हैं। अगर इस समय सही टाइम पर AI/सेवा कर दी जाए (आगे होने का टीका/दूध का टिक्का), तो पशु के गाभिन होने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है।भैंस बोलती नहीं Silent Heat Loss

अब गर्मियों में क्या होता है?

जब गर्मियों में तापमान 40°C से ऊपर चला जाता है, तो भैंस के शरीर पर गर्मी का तनाव बढ़ जाता है। इस तनाव के कारण खून में Cortisol नाम का stress hormone बढ़ने लगता है। यह hormone दिमाग से निकलने वाले GnRH hormone को दबा देता है। जब GnRH कम बनता है, तो दिमाग की Pituitary Gland भी कम FSH और LH hormone बनाती है। FSH कम होने से ओवरी में बनने वाली अंडे वाली थैली (Follicle) अच्छी तरह नहीं पकती। अंडे वाली थैली कमजोर रहने के कारण Estrogen hormone भी कम बनता है। यही Estrogen heat के बाहरी लक्षण दिखाता है, जैसे बेचैनी, बार-बार बोलना, चढ़ना-चढ़ाना और नीचे से पानी आना। लेकिन गर्मी के तनाव में Estrogen इतना कम बनता है कि ये लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। कई बार LH के थोड़े बड़ जाने से अंडा निकल जाता है। लेकिन किसान को गर्मी के लक्षण दिखाई नहीं देते। मतलब भैंस का अंदरूनी चक्र पूरा हो गया, पर किसान को पता ही नहीं चला, इसे ही Silent Heat कहते हैं या भैंस का ना बोलना/तार ना दीखाना।

भैंस एक ऐसा जानवर है जो छोटे दिनों यानी कम धूप वाले मौसम में ज्यादा अच्छी प्रजनन क्षमता दिखाती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में Short-Day Breeder कहते हैं। इसका मतलब है कि भैंस का प्रजनन चक्र दिन और रात की लंबाई से प्रभावित होता है। बरसात और सर्दियों में जब दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, तब शरीर में Melatonin hormone ज्यादा बनता है। यह hormone प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, इसलिए इस मौसम में भैंसें ज्यादा बोलती हैं और जल्दी गाभिन होती हैं। लेकिन गर्मियों में दिन लंबे और रातें छोटी होने से Melatonin कम बनने लगता है। इससे शरीर की पूरी प्रजनन चक्र कमजोर पड़ जाती है। नतीजा यह होता है कि गर्मी के लक्षण कम दिखाई देते हैं, अंडे वाली थैली (follicle) कमजोर रहती है और कई बार गर्मी के पता चलने की समस्या बढ़ जाती है। यही कारण है कि गर्मियों में भैंसों के गाभिन होने और ब्याने की दर स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है।भैंस बोलती नहीं Silent Heat Loss

एक और महत्त्वपूर्ण बात: खोज में पाया गया है कि 70% से ज्यादा भैंसें रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच गर्मी  के लक्षण दिखाती हैं। दिन की गर्मी में भैंस वैसे भी लक्षण कम दिखाती है, और जो हल्के लक्षण रात को आते हैं उन्हें देखने के लिए किसान जागता नहीं। इस तरह भैंस का ना बोलना/तार ना दीखाना चलता रहता है

Silent Heat/ भैंस बोलती नहीं है/तार नहीं दिखा रही- के मुख्य कारण विस्तार से

पहला कारण – गर्मी का तनाव: यह सबसे बड़ा कारण है। जब तापमान 40°C पार करता है और नमी भी ज्यादा होती है, तो Temperature Humidity Index (THI)/ गर्मी और नमी का पैमाना 72 से ऊपर चला जाता है। इस स्तर पर भैंस के शरीर में तनाव हार्मोन बढ़ जाते हैं, भूक  कम होती है, पानी की खपत बढ़ती है और शरीर की सारी ऊर्जा खुद को ठंडा रखने में खर्च होती है। प्रजनन चक्र के लिए कम ऊर्जा बचती है और अंडे बनाने वाला अंग की कार्यक्षमता घट जाती है।

दूसरा कारण – Estrogen की कमी: जैसा ऊपर बताया गया, Follicle ठीक से न पकने की वजह से Estrogen कम बनता है। Estrogen ही वो hormone है जो hypothalamus को इसारा  देता है कि “अभी गर्मी  का समय है” — जिससे व्यवहार बदलता है। कम Estrogen मतलब कम व्यवहार, यानी भैंस का ना बोलना/तार ना दिखाना।भैंस बोलती नहीं Silent Heat Loss

तीसरा कारण – पोषण की कमी: हरियाणा में गर्मियों में हरे चारे की उपलब्धता कम हो जाती है। किसान सूखा चारा और भूसा खिलाते हैं। इससे Vitamin A (Beta-Carotene), Vitamin E, Selenium, Zinc, Copper और Manganese की कमी होती है। ये सब प्रजनन हार्मोन के सन्तुलन और Follicle के विकास के लिए जरूरी हैं। Selenium और Vitamin E मिलकर अंडे बनाने वाला अंग को हानिकारक कण से बचाते हैं। Beta-Carotene Progesterone बनाने में मदद करता है। Zinc LH receptor को शुरुआत करता है। इनकी कमी में पूरा परजनन चक्र  धीमा पड़ जाता है।

चौथा कारण – Body Condition Score (BCS) का कम होना (यह एक पैमाना है जो बताता है कि पशु (गाय, भैंस) का शरीर दुबला है, सामान्य है या मोटा है।): ब्याने के बाद भैंस बहुत ऊर्जा दूध बनाने में लगाती है। अगर उसे पर्याप्त खुराक न मिले, तो वह दुबली हो जाती है। BCS 2.5 से कम होने पर भैंस का शरीर परजनन को ” प्राथमिकता ” देना बंद कर देता है क्योंकि शरीर समझता है कि अभी जीवित रहना जरूरी है, प्रजनन बाद में। ऐसी भैंस ना बोलती है/ना तार दिखाती है।  

पाँचवाँ कारण – खराब पशु आवास प्रबंधन: बंद, गर्म, भीड़भाड़ वाले शेड में भैंस को ज्यादा गर्मी लगती है। फिसलन वाले फर्श पर भैंस ” दूसरे पशु पर चढ़ती ” नहीं दिखती, जो गर्मी/ बोलने का मुख्य तरीका है। अगर शेड में पंखे, पानी का छिड़काव या छाया  का इंतजाम नहीं है, तो गर्मी और बढ़ती है।

छठा कारण — Post-Partum Anestrus का लम्बा होना (बछड़ा देने के बाद लंबे समय तक मादा पशु (गाय/भैंस) में हीट (गर्मी का चक्र) न आना): ब्याने के बाद स्वाभाविक रूप से भैंस को पहली गर्मी  आने में 60–90 दिन लगते हैं। गर्मियों में यह अवधि और लंबी हो सकती है। जो किसान 45 दिन से पहले दूध का टिका/बीज डलवाने की  कोशिश करते हैं, वे असफल  होती है।

आर्थिक नुकसान का पूरा हिसाब – 1 से 20 भैंसों वाले किसान के लिए

पशु का ना बोलना /तार ना दिखाना सिर्फ एक जैविक समस्या नहीं है – यह एक आर्थिक आपदा है जो धीरे-धीरे किसान की कमाई खाती रहती है।

जब एक भैंस 4 महीने आगे के नहीं होती और खाली रहती है, तो सबसे पहला नुकसान दूध का होता है। एक अच्छी Murrah भैंस औसतन 8 से 12 लीटर दूध रोज देती है। अगर वह गाभिन होती तो अगली दुग्धावस्था में दूध शुरू होता। लेकिन खाली रहने से यह चक्र  पीछे खिसकती रहती है। ₹55–₹60 प्रति लीटर के भाव पर 4 महीने में एक भैंस का दूध नुकसान ₹50,000 से ₹70,000 तक पहुँच सकता है। इसके ऊपर बछड़े की बिक्री ₹3,000–₹5,000, चारा खर्च ₹2,500 प्रति माह अलग से, और बार-बार बीज डलवाने   व डॉक्टर का खर्च ₹2,000-₹4,000, मिलाकर प्रति भैंस ₹15,000 से ₹30,000 का शुद्ध नुकसान होता है, भैंस बोलती नहीं Silent Heat Loss

आर्थिक नुकसान — 1 से 20 भैंसों वाले किसान के लिए

पशु का ना बोलना की वजह से अगर एक भैंस 3–5 महीने अधिक खाली रहती है, तो किसान को प्रति भैंस लगभग ₹12,000–₹30,000 का नुकसान हो सकता है। नीचे देखें:

नुकसान का प्रकार प्रति भैंस/माह 4 महीने (1 भैंस)
दूध का नुकसान (8–10 लीटर/दिन × ₹55) ₹13,200–₹16,500 ₹52,800–₹66,000
देर से ब्याने पर lactation का नुकसान ₹3,000 ₹12,000
खाली भैंस का चारा-खर्च (बिना दूध के) ₹2,500 ₹10,000
बार-बार AI / दवा / डॉक्टर खर्च ₹500–₹1,000 ₹2,000–₹4,000
बछड़े की बिक्री में देरी ₹3,000–₹5,000
कुल नुकसान (1 भैंस, 4 महीने) ₹15,000–₹30,000

अब देखते हैं — अलग-अलग हर्ड साइज़ वाले किसान का कुल नुकसान:

भैंसों की संख्या अनुमानित प्रभावित भैंसें (30–40%) कुल संभावित नुकसान (गर्मी सीजन) समाधान से संभावित बचत
1–2 भैंसें 1 ₹15,000–₹30,000 ₹12,000–₹25,000
5 भैंसें 1–2 ₹25,000–₹55,000 ₹20,000–₹45,000
10 भैंसें 3–4 ₹50,000–₹1,00,000 ₹40,000–₹85,000
20 भैंसें 6–8 ₹1,00,000–₹2,00,000 ₹80,000–₹1,70,000
अगर समय पर गाभिन हो अधिक कमाई (दूध + बछड़ा) ₹15,000–₹40,000 प्रति भैंस

Silent Heat/ भैंस बोलती नहीं है/तार नहीं दिखा रही – समस्या का प्रबंधन और समाधान: आसान चरणों में समझें

Silent Heat/ भैंस बोलती नहीं है/तार नहीं दिखा रही की समस्या का  समाधान करने के लिए कोई एक जादुई उपाय नहीं है। इसके लिए प्रबंधन, पोषण, दवा और सही निरीक्षण – चारों एक साथ काम करते हैं।

पहला कदम – Heat Stress/गर्मी का तनाव  कम करना: यह सबसे जरूरी कदम है क्योंकि गर्मी ही तार ना दिकाने की जड़ है। दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच भैंस को ठंडे पानी से नहलाएं – इससे शरीर का तापमान कम होता है 1–2°C तक कम होती है जो Cortisol घटाने के लिए काफी है। शेड में कम से कम एक पंखा या कूलर जरूर लगाएं। अगर पास में तालाब या पानी भरा खड्डा हो तो भैंस को उसमें बैठने दें। शेड/पशु घर की छत अगर सफेद रंग से पुती हो या उसके ऊपर तिरपाल/पराली  हो, तो अंदर का तापमान 4–6°C तक कम रहता है। जहाँ तक हो सके, 50–60% तिरपाल का इस्तेमाल करें। इन सब उपायों से THI 72 से नीचे रखने की कोशिश करें जो परजनन  के लिए सुरक्षित  माना जाता है।

दूसरा कदम – सही समय पर Heat Detection/पशु का बोलना पहचानना: किसान को दिन में कम से कम दो बार भैंसों का ध्यान से निरीक्षण करना चाहिए — सुबह 5 से 6 बजे और रात 10 से 11 बजे। इन दोनों समय में गर्मी  के हल्के संकेत भी ध्यान दें जैसे पूंछ का बार-बार उठना, बार-बार पेशाब करना, पशु का बाहरी प्रजनन अंग का थोड़ा लाल और भीगा दिखना, दूध 10–15% कम होना, थोड़ी बेचैनी या रंभाना।

तीसरा कदम — पोषण को दुरुस्त करना: गर्मियों में रोज 50 से 80 ग्राम Mineral Mixture/खनिज मिश्रण चारे  में मिलाएं। अगर बाजार में Chelated Mineral Mixture मिले तो वह और भी अच्छा है क्योंकि, यह शरीर में आसानी से सोख लिया जाता है। Vitamin E और Selenium का मिश्रण – या तो injection के रूप में (डॉक्टर द्वारा) या पोषक तत्व – जरूर दें। जहाँ हरा चारा उपलब्ध न हो वहाँ बरसीम  या चारे का अचार दे सकते हैं। बाजरे या ज्वार का हरा चारा Beta-Carotene का अच्छा स्रोत है। पानी हमेशा साफ और ठंडा होना चाहिए — एक Murrah भैंस गर्मियों में 60–80 लीटर पानी रोज पीती है।

चौथा कदम — Body Condition Score (BCS) ठीक रखना (यह एक पैमाना है जो बताता है कि पशु (गाय, भैंस) का शरीर दुबला है, सामान्य है या मोटा है।): ब्याने के बाद किसान अक्सर भैंस का दाना राशन कम कर देते हैं। यह गलत है। पहले 60–90 दिन तक भैंस को ज्यादा ताकत देने वाला दाना दें। राशन में Bypass Fat/ ताकत बढ़ाने वाला विशेष फैट (100–150 ग्राम प्रतिदिन) मिलाएं – यह दूध उत्पादन और परजनन  दोनों के लिए फायदेमंद है। BCS 3 से 3.5 के बीच रखें – न बहुत दुबली, न बहुत मोटी।

पाँचवाँ कदम — नियमित पशु चिकित्सक जाँच: हर महीने — खासकर अगर भैंस 60 दिन बाद भी गर्मी  न दिखाए — पशु चिकित्सक को जांच  करवाएं। इससे पता चलता है कि अंडे बनाने वाला अंग में कोई दिक्कत की जांच  करवाएं। यह जाँच free या बहुत कम खर्च में सरकारी पशु अस्पतालों में हो जाती है।

दवाइयाँ प्राकृतिक और रासायनिक (पशु चिकित्सक की सलाह से)

प्राकृतिक दवाइयाँ

Herbal दवाइयों में Ashoka (अशोक छाल), Shatavari (शतावरी), Lodhra (लोध), Dashmool और Ashwagandha जैसी जड़ी-बूटियाँ होती हैं। ये बच्चेदानी को मजबूत करती हैं, शरीर का हार्मोनल बैलेंस सुधारती हैं और धीरे-धीरे गर्मी  आने में मदद करती हैं। किसान घर पर भी आसान प्राकृतिक मिश्रण बना सकते हैं। 50 ग्राम शतावरी पाउडर, 25 ग्राम अशोक छाल पाउडर, 20 ग्राम अश्वगंधा और 20 ग्राम लोध पाउडर को मिलाकर रोज 50–60 ग्राम गुड़ या दाने में मिलाकर 45 दिन तक दे सकते हैं। इसके साथ खनिज मिश्रण जरूर दें क्योंकि Zinc, Selenium और Copper परजनन के लिए बहुत जरूरी हैं।

Chemical / Hormonal दवाइयाँ (केवल पशु चिकित्सक द्वारा)

अगर समस्या ज्यादा हो तो पशु चिकित्सक Hormonal treatment देते हैं जैसे GnRH, PGF2α या CIDR। ये दवाइयाँ गर्मी को शुरू करने और अंडा निकलने में मदद करता हैं। Ovsynch protocol silent heat में बहुत उपयोगी माना जाता है क्योंकि इसमें तय समय पर AI की जाती है/बीज डलवाया जाता है। लेकिन हार्मोनल दवाइयाँ हमेशा पशु चिकित्सक की सलाह से ही देनी चाहिए, क्योंकि गलत दवा या गलत समय नुकसान कर सकता है।

किसान का गर्मी मौसम में रोज का काम

गर्मी के मौसम में यानी मार्च से जुलाई तक हर किसान को ये काम रोज करने चाहिए। सुबह 5 से 6 बजे — सभी भैंसों को ध्यान से देखें, गर्मी  के हल्के लक्षण नोट करें, पूंछ, पशु का बाहरी प्रजनन अंग और व्यवहार जाँच करें। दोपहर 12 से 4 बजे — ठंडे पानी से नहलाएं, पंखा चलाएं, छाँव में रखें, ठंडा और साफ पानी पिलाएं। शाम को चारे  के साथ खनिज मिश्रण और प्राकृतिक दवाइयाँ दें। रात 10 से 11 बजे — एक बार और निरीक्षण करें, खासकर अगर कोई भैंस 18–22 दिन पहले cycle में थी। हर महीने पशु चिकित्सक से एक बार जाँच करवाएं।

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